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स्वामी विवेकानंद के सपनों का युवा

                                                             स्वामी विवेकानंद के सपनों का युवा


(1) मुखमंडल तेजस्वी हो !                                                                

(2) वाणी ओजस्वी हो !                                                                     

(3) शरीर में शक्ति हो !

(4) मन में उत्साह हो !       

(5) सद्बुद्धि और विवेक हो !                                               

(6) हृदय में करुणा हो !          

(7) मातृभूमि पर प्रेम हो !

(8) इंद्रियों पर संयम हो !

(9) मन जिसका स्थिर हो !

(10) आत्मविश्वास दृढ़ हो !

(11) इच्छाशक्ति प्रबल हो !

(12) साहसी शूरवीर हो !

(13) सिंह जैसा निर्भय हो !

(14) लक्ष्य जिसका ऊंचा हो !

(15) सत्य जिसका ईश्वर हो !                                                              

(16) व्यसनों से मुक्त हो !  

(17) जीवन में अनुशासन हो ! 

(18) मधुर प्रेममयी वाणी हो ! 

(19) सम्पूर्ण जगत कुटुंब हो ! 

(20) गुरुजनों पर सम्मान हो ! 

(21) माता - पिता पर श्रद्धा हो ! 

(22) मानवीय संवेदना हो ! 

(23) दीन - दुखियों का मित्र हो ! 

(24) सेवा में सदा तत्पर हो ! 

(25) ईश्वर में भक्ति हो ! 

(26) अचल देशभक्ति हो ! 

(27) जीवन पूर्ण नैतिक हो ! 

(28) चरित्र जिसका शुद्ध हो !

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पावन भिक्षा (समर्थ गुरु रामदास) - गोविंददेव गिरि जी महाराज

पावन भिक्षा (समर्थ गुरु रामदास)  राम राम जय राजा राम। पावन भिक्षा दे दो राम।  कोमल वाणी दे दो राम। निर्मल करणी दे दो राम। कोमल वाणी दे दो राम। निर्मल करणी दे दो राम। प्रासंगिक मति दे दो राम। चतुराई भी दे दो राम।।1।। हितकारक जो दे दो राम। जनसुखकारक दे दो राम। इंगितज्ञता दे दो राम। बहुजन मैत्री दे दो राम।।2।। विद्या वैभव दे दो राम। उदासीनता दे दो राम।  अयाचना व्रत दे दो राम। मैं न जानू वह दे दो राम।।3।।  प्यार तुम्हारा दे दो राम। दास कहे मोहे दो श्रीराम।  संगीत गायन दे दो राम। गान मधुरता दे दो राम।।4।। सावधानता दे दो राम। ज्ञान कण्ठगत दे दो राम। दास कहे हे सद्गुण धाम। उत्तम गुण मोहे दे दो राम।।5।।  पावन भिक्षा दे दो राम। निर्मल मति मोहे दो श्रीराम।  अभेद भक्ति दे दो राम। आत्म निवेदन दे दो राम।।6।। तन्मयता मोहे दे दो राम। ब्रह्मचर्य व्रत दे दो राम। सज्जन संगति दे दो राम। राष्ट्र भक्ति दे दो राम।।7।। ब्रह्म अनुभव दे दो राम। अनंत सेवा दे दो राम।  पूर्ण समर्पण दे दो राम। दास कहे मोहे दो श्रीराम।।8।। राम राम जय राजा राम। पावन भिक्षा दे दो राम।

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