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पावन भिक्षा (समर्थ गुरु रामदास) - गोविंददेव गिरि जी महाराज

पावन भिक्षा (समर्थ गुरु रामदास) 

राम राम जय राजा राम। पावन भिक्षा दे दो राम। 

कोमल वाणी दे दो राम। निर्मल करणी दे दो राम।

कोमल वाणी दे दो राम। निर्मल करणी दे दो राम।

प्रासंगिक मति दे दो राम। चतुराई भी दे दो राम।।1।।

हितकारक जो दे दो राम। जनसुखकारक दे दो राम।

इंगितज्ञता दे दो राम। बहुजन मैत्री दे दो राम।।2।।

विद्या वैभव दे दो राम। उदासीनता दे दो राम। 

अयाचना व्रत दे दो राम। मैं न जानू वह दे दो राम।।3।। 

प्यार तुम्हारा दे दो राम। दास कहे मोहे दो श्रीराम। 

संगीत गायन दे दो राम। गान मधुरता दे दो राम।।4।।

सावधानता दे दो राम। ज्ञान कण्ठगत दे दो राम।

दास कहे हे सद्गुण धाम। उत्तम गुण मोहे दे दो राम।।5।। 

पावन भिक्षा दे दो राम। निर्मल मति मोहे दो श्रीराम। 

अभेद भक्ति दे दो राम। आत्म निवेदन दे दो राम।।6।।

तन्मयता मोहे दे दो राम। ब्रह्मचर्य व्रत दे दो राम।

सज्जन संगति दे दो राम। राष्ट्र भक्ति दे दो राम।।7।।

ब्रह्म अनुभव दे दो राम। अनंत सेवा दे दो राम। 

पूर्ण समर्पण दे दो राम। दास कहे मोहे दो श्रीराम।।8।।

राम राम जय राजा राम। पावन भिक्षा दे दो राम।

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