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पाठ्य पुस्तकें कुछ कहना चाहती हैं.............

 

 

पाठ्य पुस्तकें कुछ कहना चाहती हैं.............

प्यारे दोस्तों,

मैं आपका दोस्त हूँ I ऐसा दोस्त जो आपको बहुत सी नई – नई जानकारीयां देगा I देश और दुनिया के बारे में बताएगा I परिवार और समाज में मिल – जुल कर रहना सीखाएगा I चाँद और तारों के किस्से सुनाएगा I एक जोड़ एक, दो होता है और एक और एक मिलकर ग्यारह होते हैं कैसे ? इसका रहस्य बताएगा I एक सभ्य नागरिक बनने के सारे गुण सीखाएगा I बस..... मुझसे दोस्ती करने के लिए आपको एक कदम बढ़ाना होगा I

Ø  सबसे पहले मुझे संभाल कर रखना होगा I जिल्द लगा कर मेरा तन ढकना होगा I जिल्द पारदर्शी हो, ताकि मेरे आवरण से हमेशा आप रु – ब – रु हों I

Ø  मुझको बोल – बोल कर पढ़ना होगा I सुनना और समझना होगा I गुरुजी के पढ़ाने से पहले खुद मुझको पढ़कर समझने की कोशिश करनी होगी I जब समझ में न आये मेरी बात तो आप करो गुरुजी से प्रश्न  I

Ø  पेन्सिल का करें इस्तेमाल, मेरे अंदर ही हर बात, जो आपको लगे अच्छी, उसे रेखांकित कर बार – बार पढ़ें आप I

Ø  पढ़ने के साथ लिखना भी होगा I मेरे अंदर लिखी बात को समझ कर अपने शब्दों में कॉपी पर लिखें आप I

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पावन भिक्षा (समर्थ गुरु रामदास) - गोविंददेव गिरि जी महाराज

पावन भिक्षा (समर्थ गुरु रामदास)  राम राम जय राजा राम। पावन भिक्षा दे दो राम।  कोमल वाणी दे दो राम। निर्मल करणी दे दो राम। कोमल वाणी दे दो राम। निर्मल करणी दे दो राम। प्रासंगिक मति दे दो राम। चतुराई भी दे दो राम।।1।। हितकारक जो दे दो राम। जनसुखकारक दे दो राम। इंगितज्ञता दे दो राम। बहुजन मैत्री दे दो राम।।2।। विद्या वैभव दे दो राम। उदासीनता दे दो राम।  अयाचना व्रत दे दो राम। मैं न जानू वह दे दो राम।।3।।  प्यार तुम्हारा दे दो राम। दास कहे मोहे दो श्रीराम।  संगीत गायन दे दो राम। गान मधुरता दे दो राम।।4।। सावधानता दे दो राम। ज्ञान कण्ठगत दे दो राम। दास कहे हे सद्गुण धाम। उत्तम गुण मोहे दे दो राम।।5।।  पावन भिक्षा दे दो राम। निर्मल मति मोहे दो श्रीराम।  अभेद भक्ति दे दो राम। आत्म निवेदन दे दो राम।।6।। तन्मयता मोहे दे दो राम। ब्रह्मचर्य व्रत दे दो राम। सज्जन संगति दे दो राम। राष्ट्र भक्ति दे दो राम।।7।। ब्रह्म अनुभव दे दो राम। अनंत सेवा दे दो राम।  पूर्ण समर्पण दे दो राम। दास कहे मोहे दो श्रीराम।।8।। राम राम जय राजा राम। पावन भिक्षा दे दो राम।

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